The journey to the Hillock-Chamundi Hills
2026 की पहली यात्रा: संकल्प और साहस का शिखर यह 31 दिसंबर 2025 की शाम थी। मैं दोस्तों के साथ कॉफी का आनंद ले रहा था कि अचानक डॉ. अमित ने एक प्रस्ताव रखा: "क्यों न कल सुबह पैदल रास्ते से चामुंडी हिल्स की चढ़ाई की जाए?" शुरुआत में मैं थोड़ा हिचकिचाया। चामुंडी की सीढ़ियाँ चढ़े मुझे सात साल से ज़्यादा का समय हो गया था। मेरे मन में द्वंद्व था; चढ़ाई में फेफड़ों पर ज़ोर पड़ता है, तो उतरते समय घुटनों पर अत्यधिक दबाव। हाल ही में फेफड़ों के संक्रमण के कारण मैं ऐसी भारी मेहनत से बच रहा था। लेकिन दोस्तों के दबाव और अपने भीतर के पर्वतारोही के कारण मैंने 'हाँ' कह दिया। आखिर कहा जाता है न— "एक बार जो पर्वतारोही बन गया, वह हमेशा पर्वतारोही ही रहता है।" मन में संदेह था कि क्या मैं चोटी तक पहुँच पाऊँगा। लेकिन जब 1 जनवरी 2026 की सुबह अलार्म बजा, तो मैंने एक कोशिश करने की ठानी। सुबह के नित्य कर्म निपटाकर मैं योग नरसिम्हा मंदिर पहुँचा और अपनी टीम के साथ जुड़ गया। डॉ. अमित हमें पहाड़ी के निचले हिस्से तक ले गए। वहाँ पहुँचकर मैं यह देखकर हैरान रह गया कि परिदृश्य कितना बदल गया है। सीढ़िय...